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Showing posts from February, 2021

नदी बोली समन्दर से | Kunwar Bechain

नदी बोली समन्दर से, मैं तेरे पास आई हूँ। मुझे भी गा मेरे शायर, मैं तेरी ही रुबाई हूँ।। मुझे ऊँचाइयों का वो अकेलापन नहीं भाया लहर होते हुये भी तो मेरा मन न लहराया मुझे बाँधे रही ठंडे बरफ की रेशमी काया। बड़ी मुश्किल से बन निर्झर, उतर पाई मैं धरती पर छुपा कर रख मुझे सागर, पसीने की कमाई हूँ।। मुझे पत्थर कभी घाटियों के प्यार ने रोका कभी कलियों कभी फूलों भरे त्यौहार ने रोका मुझे कर्तव्य से ज़्यादा किसी अधिकार ने रोका। मगर मैं रुक नहीं पाई, मैं तेरे घर चली आई मैं धड़कन हूँ मैं अँगड़ाई, तेरे दिल में समाई हूँ।। पहन कर चाँद की नथनी, सितारों से भरा आँचल नये जल की नई बूँदें, नये घुँघरू नई पायल नया झूमर नई टिकुली, नई बिंदिया नया काजल। पहन आई मैं हर गहना, कि तेरे साथ ही रहना लहर की चूड़ियाँ पहना, मैं पानी की कलाई हूँ। --कुँवर बेचैन  

Valentine's Day Shayari

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  दो कदम और जायेंगे संग में रहो तो सही वेवजह भी मुस्कुरायेंगे तुम कहो तो सही दो धड़कते हुए दिल एक दूजे के लिए एक ही हो जायेंगे तुम कहो तो सही। सुना है बड़े तेरे चाहने वाले हैं पर कहाँ हम भी मानने वाले हैं यूँ न गुज़रा कर मेरे दिल के गलियारों से वहाँ और भी मेरे जानने वाले हैं। ए हवा ज़रा आहिस्ता आहिस्ता तो चल वो तनिक देर में मेरी सासों को पहचानने वाले हैं। वो ज़ुल्फ़ें माथे पर हाँ तेरी जो हैं मत पूछ तू हाल मेरा कितना तड़पती हैं जो छुप छुप कर देखती हैं ज़ालिम नज़रें तेरी वो जानती हैं मर जाऊँगा फिर भी मुस्कुराती है। कभी लगा के वो कजरा कभी लगा के वो लाली यूँ लेती है वो बदला जब खुद को सजाती है। इश्क़ पर मुकदमा यूँ जायज़ नहीं ख़ताएँ दोनों की हैं एक की शायद नहीं आ मिल बैठकर सुलह कर लें दिल के मुकदमों के लिए कोई अदालत नहीं।

अंधियारा है बहुत यहाँ अब तुम दह लो या मैं दह लूँ , प्रमोद तिवारी

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अंधियारा है बहुत यहाँ अब तुम दह लो या मैं दह लूँ एक कहानी उजियारे की तुम कह दो या मैं कह दूं।। जिन लहरों पे हम तिरते थे वे दरिया में डूब गईं डूबी लहरो में चाहे तुम बहलो या मैं बह लूँ ।। जख्म भले ही अलग अलग हो लेकिन दर्द बराबर है कोई फर्क नही पड़ता है तुम सह लो या मैं सह लूँ ।। आँखों की दहलीज पे आके सपना बोला आँसू से  घर तो आख़िर घर होता है तुम रह लो या मैं राह लूँ।। अंधियारा है बहुत यहाँ अब तुम दहलो या मैं दह लूँ  एक कहानी उजियारे की तुम कह दो या मैं कह दूं।।

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